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Thursday, November 15, 2018

जानें, क्या है प्यार शब्द का अर्थ, तीन चरणों में होता है प्यार



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हैलो, दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे ब्लॉगर पर आज मैं आपसे बहुत ही मुख्य विषय के बारे में बात करने जा रहा हूँ । जिसके बारे में सभी के मन में कोई न कोई बात तो जरूर आती होगी और प्यार का शब्द सुनते ही आप जिनसे प्यार करते होंगे तुरंत उन्ही के बारे में सोचने लगते होंगे। आज हम जानने की कोशिश करेंगें कि, प्यार का वास्तविक मतलब क्या है, आखिर क्या होता हैं सच्चा प्यार  और किन- किन स्थिति में व्यक्ति को प्यार होता है।
मित्रों, प्यार एक बहुत सुंदर एहसास है जोकि किसी व्यक्ति से अधिक लगाव होने के कारण ही होता है और वही लगाव सच्चा प्यार है। जिसके होने पर दोस्तों आप बहुत ही निर्मल और कोमल स्वाभाव के बन जाते हो, यही एक सच्चे प्रेम का स्वाभाव होता है। 
मित्रों, आपने बहुत बार सच्चे प्यार के बारे में बातें सुनी होंगी, लेकिन क्या सच में आप सच्चे प्यार के बारे में जानते हैं? दोस्तों, हमारे पास जो भी सच्चे प्यार के बारे में जानकारी होती है, वह हमारे आसपास से, फिल्मों से या आसपास के लोगों से आई हुई होती है। सच्चा प्यार एक पूरा ब्रह्माण्ड है, पूरी दुनिया है। प्यार ही सब कुछ है यह एक धर्म भी है। आपको पता नही होगा कि शायद दुनिया में सबसे पहला धर्म कौन सा होगा? लेकिन, प्रेम ही दुनिया का सबसे पहला सच्चा और पुराना धर्म होगा। आप किसी भी धर्म में हो या किसी भी धर्म का अध्यन्न करो तो, दोस्तों वह आपको हमेशा यही सिखाता है कि प्रेम से रहो, प्रेम- भाव से ही रहो। लेकिन यह जो धर्म है वह बस एक अलग- अलग रास्ता है प्रेम तक पहुँचने का और यही एक ज्ञानी भी सिखाता है। एक इंसान की उत्पत्ति भी प्रेम से ही होती है। प्रेम ही हमारे जीवन का सार है और प्रेम ही इस जगत का आधार है। इंसान को कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए, कोई दिल चाहिए जो उसकी भावनाओं को समझे। तब उनको यह कमी महसूस होगी कि कोई उनके साथ ऐसा व्यक्ति है जो, उनसे अच्छी तरह से बात कर लेता है। तो हमें लगता है कि, हमें उनसे प्यार हो गया है। लेकिन, ऐसा नही होता। प्यार का पहला चरण होता हैं, उससे प्यार करना।
जब तक किसी इंसान को उससे प्यार नही होता तब तक वह इंसान प्यार कर ही नही सकता। क्योंकि आप अपने लिए ऐसा महसूस करते हो तो फिर दूसरे के लिए आप किस तरह से प्यार महसूस कर पाओगे। 
दोस्तों, प्यार का यह मतलब नही कि आप स्वार्थी बन जाओ और सिर्फ अपने बारे में ही सोचो। खुद से प्यार होने का मतलब है कि आप, अपने को पसन्द आने लगते हो। आपकी बातें, आदतें जो भी आप में हैं उनसे आप खुश हो जाते हो। यहाँ पर आपको किसी दूसरे व्यक्ति की जरूरत भी नही होती क्योंकि आप, अपने में ही खुश होते हो और खुद को ही प्यार करते हो। तब आपका दिल तथा आत्मा उस चरण पर या उस स्थिति पर पहुंच जाती है। उसी के बाद दूसरे इंसान से प्यार होता है। ठीक उसी तरह से जिस तरह से खुद को प्यार करता, खुद के लिए खुश रहता था। और वह दूसरे इंसान के साथ अपनी खुशियोँ, भावनाओं को शेयर करता रहता है। यहाँ पर भी वह उनके लिए बहुत अच्छा एहसास करता है उनके लिए कुछ भी कर सकता है और वही उनके लिए दुनिया बन जाती। जब आपको यह दूसरे चरण का प्यार होता है तो बुरी तरीके से आप अपने साथी को प्यार करते हो उसको बाद आपका प्रेम ना आपके लिए रहता है और ना ही दूसरे इंसान के लिए। आपका प्रेम सिर्फ और सिर्फ भगवान् के लिए होता है इसका मतलब यह नही कि वह भगवान् के अलावा किसी चीज़ को देखता नही है। यदि किसी व्यक्ति का दूसरे इंसान के साथ व्यवहार, भाव अच्छा होता है, अच्छे से बात करता है तो वह स्वयं ही भगवान् के साथ वह सारा व्यवहार कर रहा है। उनको भगवान से प्यार होता है यानी कि कुदरत! 
तब उनके दिल में यह महसूस होता है कि, जो इंसान दुनिया को चला रहा है उसका थोडा सा अंश, थोडा सा भाग मेरे अंदर भी है। मैं भी इन सारी चीजों से जुड़ा हुआ हूँ तब पता चलता है कि मैं भी एक सत्य का हिस्सा हूँ। इंसान का जन्म प्यार से होता हैं, तो इंसान भी प्रेम है, कुदरत भी प्रेम है और प्रेम भी खुद एक प्रेम है।

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2 comments:

  1. It is a very good article and this one line 'Love does not mean that you become selfish and think only about yourself' is what my wife had done to me. Now she regrets what she did and did not care how much she hurt anyone and karma has taken over and making her work harder than she ever had before.

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  2. Thanks to keep your love and support toward us.

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