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Saturday, November 17, 2018

भारत के महान भिक्षु बोधिधर्मन का इतिहास जिन्होंने चीन में मार्शल आर्ट और कुंगफू की दिशा ही पलट दी क्या थी इनकी पहचान?

बोधिधर्म, बोधिधर्म का इतिहास जिन्होंने भारतीय होकर चीन में मार्शल आर्ट की दिशा पलट दी और कुंगफू को जन्म देने का जन्मदाता समझा जाने लगा



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नमस्कार, दोस्तों! स्वागत है आप सभी का ब्लॉगर पर जहाँ आपको हर दिन इसी तरह पोस्ट मिलते रहेंगे। 
आज मैं जिनके बारे में बातने वाला हूँ वह एक महान भिक्षु या व्यक्ति हैं जिन्होंने बौद्ध धर्म की नींव रखी। बोधिधर्मन के बारे में जिन्होंने सबसे पहले संसार में मार्शल आर्ट और ध्यान केंद्रित किया और लोगों को भी ध्यान करना सिखाया और आज के समय में इनको ध्यान का चयन करने और मार्शल आर्ट को जन्म देने वाले गुरु, भगवान् या पिता माना जाता है। 

आज हम समझने की कोशिश करेंगें कि, भारत के बोधिधर्मन ने किस तरह से मार्शल आर्ट का प्रारंभ किया कि उनको मार्शल आर्ट को जन्म देने वाला पिता माना जाने लगा। 
दोस्तों आज हम इनके बारे में कुछ जुडी और ना जुडी हुई बातों को समझने की कोशिश करेंगें। 

बोधिधर्म एक बौद्ध धर्म के भिक्षु थें। इनका जन्म भारत के दक्षिणी पल्लव राज्य के कांचीपुरम के राज परिवार में हुआ। बोधिधर्म कांचीपुरम के राजा के तीसरे पुत्र थें। इन्होंने अपने जीवन की बहुत कम उम्र में ही अपना राज्य छोड़ दिया और एक महान भिक्षु बन गयें। उन्होंने 22 साल की उम्र में ध्यान केंद्रित ( मोक्ष की प्रथमावस्था को प्राप्त किया)

बोधिधर्मन एक भारतीय ही थें, जिन्होंने संसार में सबसे पहले मार्शल आर्ट और ध्यान केंद्र बनाने की नींव रखी थी। इन्हीं के माध्यम से जापान, चीन और कोरिया में बौद्ध धर्म स्थापित हुआ। 5वीं और 6वीं शताब्दी में ध्यान सम्प्रदाय की नींव रखी थी जिसे "च्यन" या "झेन" कहते हैं। 
बोधिधर्म बहुत ही कम उम्र के थें जब इन्होंने विद्या को पारंगत कर लिया था। बोधिधर्मन नाम से अलग- अलग बातें और जुड़े हुए हैं जोकि सुनने एवम् पढ़ने को मिलती हैं, जिनमे से एक बात ओशो रजनीश द्वारा कही हुई है कि, वह सबसे ज्यादा सत्य के नज़दीक हैं! 
प्रबुद्ध होने पर और राजमाता के आदेश पर उन्हें चीन भेजा गया था। 

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कौन थें बोधिधर्म? 


बोधिधर्म एक ऐसा नाम है जिन्होंने भारत में जन्म लिया और हैरानी की बात यह कि भारतीय लोग ही इनके बारे में नही जानते हैं। भारत में कभी ऐसे व्यक्तियों का इतिहास नही लिखा गया या संवरक्षित नही किया जो हीरे थें, जिनमे से बोधिधर्म एक थें! महान भिक्षु बोधिधर्म के बारे में हर भारतीय नही जानता लेकिन हर बौद्ध धर्म या चीन में रहने वाला व्यक्ति जानता है और हर एक भारतीय को भी जानना चाहिए। जो एक भारतीय होकर चीन में शाओलिन, मार्शल आर्ट और ध्यान च्यन करना सिखया। जोभी महान बोधिधर्मन में बारे में जानता हैं वो मार्शल आर्ट का पूरा इतिहास जानता होगा। 

बोधिधर्मन आयुर्वेद, सम्मोहन मार्शल आर्ट और पञ्च तत्वों को काबू में रखने की विद्या जानते थें। इन्होंने देव शक्तिओं को भी हासिल कर रखा था। इन्होंने अपनी चीन यात्रा समुद्री मार्ग से की। वे चीन के दक्षिणी समुद्री तट केन्टन बन्दरगाह पर उतरें।

चीन का शिलांग मंदिर, झन लोग कुंगफू और मार्शल आर्ट सिखने और सिखाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन इस जगह की महत्वपूर्ण कड़ी भारत से जुडी हुई है। जो हैं, बोधिधर्मन! जिन्होंने 5वीं सदी में जाकर वहां मार्शल आर्ट की दिशा ही पलट दी। उन्होंने ही चीन के लोगों को लड़ने की यह कारगर तकनीकी सिखाई । बोधिधर्मन चीन के एक नाइनिक गाँव में रहने लगें। इस के ज्योतिषों की भविष्यवाणी के अनुसार गाँव में एक बड़ा संकट आने वाला था और वह संकट गाँव वाले बोधिधर्मन को समझने लगें जिसके बाद गाँव वालो ने इन्हों गांव से बहार निकाल दिया और फिर वह गांव के बाहर रहने लगें। लोगों को लगा संकट टल गया। 

लेकिन, दरअसल संकट तो एक जानलेवा बीमारी के रूप में आने वाला था और आ भी गया। लोग बीमार होने लगें और गाँव में हड़कंप मच गयी। गाँव में बीमारी से ग्रसित बच्चों को बाहर छोड़ा जाने लगा ताकि अन्य किसी को यह बिमारी ना लग पाये। 
बोधिधर्मन चूँकि एक आयुर्वेदाचार्य भी थें तो उन्होंने ऐसे लोगों की मदत्त की और लोगों को मौत के मुह में जाने से भी बचा लिया। 
तब गाँव गाँव के लोगों को समझ आया कि यह इंसान हमारे लिए संकट नही बल्कि संकताहर्ता के रूप में आया है। 

दोस्तों, आज बोधिधर्म के बारे में भारतीयों से ज्यादा चीन के लोग जानते हैं, जबकि बोधिधर्म एक भारतीय थें। इस पोस्ट को इतना शेयर करिए कि हर भारतीय बोधिधर्म के बारे में जाने। 

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